झारखंड-पश्चिम बंगाल पर निम्न दबाव का असर, बिहार समेत कई राज्यों में भारी बारिश की संभावना
मुख्य मौसम बिंदु
- निम्न दबाव क्षेत्र गंगीय पश्चिम बंगाल, उत्तरी ओडिशा और झारखंड पर बना हुआ है।
- BOB और तटीय ओडिशा-पश्चिम बंगाल के पास नया चक्रवाती परिसंचरण बन सकता है।
- झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी बारिश की संभावना है।
- बिहार को बारिश की कमी कम होने से राहत मिल सकती है।
- पूर्वानुमान वैधता: यह मौसम पूर्वानुमान सितंबर की शुरुआत तक मान्य है।
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कल बना निम्न दबाव क्षेत्र अब गंगीय पश्चिम बंगाल, उत्तरी ओडिशा और झारखंड के ऊपर स्थित है। इससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण 20,000 फीट से अधिक ऊंचाई तक फैला हुआ है और ऊंचाई के साथ दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर झुका हुआ है। यह सिस्टम धीरे-धीरे उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ेगा और बिहार, झारखंड तथा छत्तीसगढ़ के त्रि-जंक्शन यानी तीनों राज्यों के मिलन वाले क्षेत्र के आसपास पहुंच सकता है। इसकी गति धीमी रहने की संभावना है और यह सिस्टम अंदरूनी हिस्सों में बहुत दूर तक जाने के बजाय एक-दो दिन इसी क्षेत्र के आसपास ठहर सकता है।
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इसी बीच 27 अगस्त 2026 के आसपास उत्तरी बंगाल की खाड़ी तथा तटीय ओडिशा और पश्चिम बंगाल के पास एक नया चक्रवाती परिसंचरण बनने की संभावना है। मौजूदा निम्न दबाव क्षेत्र का बचा हुआ हिस्सा पीछे की ओर लौटकर इस नए सिस्टम के साथ मिल सकता है। दोनों मौसम प्रणालियों के मिलने से पूर्वी भारत में लगातार कम समय के अंतराल पर एक और निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है। यानी 27 अगस्त के बाद पूर्वी राज्यों में मौसम गतिविधियां फिर से तेज हो सकती हैं।

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झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भारी बारिश
22° उत्तरी अक्षांश के आसपास एक पूर्व-पश्चिम दिशा में फैला मजबूत शियर जोन बना हुआ है। यह शियर जोन मौजूदा निम्न दबाव क्षेत्र से जुड़े चक्रवाती परिसंचरण के अक्ष के साथ स्थित है। निम्न दबाव और शियर जोन, दोनों के प्रभाव से झारखंड, उत्तरी ओडिशा, उत्तरी छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश में व्यापक बारिश और मौसम गतिविधि होने की संभावना है। मुख्य सिस्टम का प्रभाव पश्चिमी मध्य प्रदेश और दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों तक भी पहुंच सकता है।
मध्य प्रदेश में गुना, ग्वालियर, टीकमगढ़, भिंड, मुरैना, शिवपुरी, नीमच, राजगढ़, रतलाम, उज्जैन, खंडवा, खरगोन, धार और इंदौर जैसे क्षेत्रों में मौसम सक्रिय रह सकता है। उत्तर प्रदेश में प्रयागराज, कानपुर, लखनऊ, चित्रकूट, फतेहपुर, रायबरेली, अयोध्या और आसपास के इलाकों में बारिश और मौसम गतिविधियों का फोकस रहने की संभावना है। इसलिए इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को आने वाले दिनों में बारिश के दौर के लिए तैयार रहना होगा।
27 अगस्त के बाद फिर तेज होगा बारिश का दौर, सितंबर तक असर
27 अगस्त को दोनों मौसम प्रणालियों के दोबारा मिलने के बाद पूर्वी राज्यों में मौसम गतिविधियों की एक नई और तेज लहर आने की संभावना है। इसके चलते अगस्त के बचे हुए दिनों में पूर्वी भारत में लंबे समय तक बारिश का दौर चल सकता है और इसका असर सितंबर की शुरुआत तक भी जारी रह सकता है। कुछ स्थानों पर कई दिनों तक बहुत भारी बारिश हो सकती है। लगातार कई दिनों तक बारिश होने से स्थानीय स्तर पर जलभराव और कुछ क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने का खतरा भी रहेगा।
पूर्वी और मध्य भारत से जुड़े अधिकांश उप-विभाग, पश्चिम बंगाल और ओडिशा को छोड़कर, फिलहाल बारिश की कमी से जूझ रहे हैं। लंबे समय तक चलने वाला यह बारिश का दौर इस कमी को कम करने में मदद कर सकता है। इसका सबसे अधिक फायदा बिहार को मिलने की संभावना है, क्योंकि इस क्षेत्र में बिहार बारिश की कमी वाला सबसे प्रमुख क्षेत्र बना हुआ है। दूसरी ओर, देश के उत्तर, पश्चिम और दक्षिणी हिस्सों में मौसम गतिविधि काफी कम रहने की संभावना है। इनमें राजस्थान, पश्चिमी मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र के समुद्र से दूर स्थित उप-विभाग और दक्षिणी प्रायद्वीप के कई हिस्से शामिल हैं। यानी आने वाले दिनों में बारिश का मुख्य फोकस पूर्वी और इससे सटे मध्य भारत पर ही रहने की संभावना है।















