जून में तेज़- जुलाई में सुस्त, क्या अगस्त बदल देगा मानसून की पूरी तस्वीर?
मुख्य मौसम बिंदु
- जून 2026 में देशभर में सामान्य से 40% कम बारिश दर्ज हुई।
- 2 अगस्त तक मौसमी वर्षा घाटा घटकर 12% रह गया है।
- अगस्त के पहले सप्ताह में बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है।
- जुलाई में सामान्य से 4% अधिक वर्षा हुई और कई राज्यों में खरीफ बुवाई को फायदा मिला।
- पूर्वानुमान वैधता: यह पूर्वानुमान 3 अगस्त से लगभग 15 अगस्त 2026 तक मान्य है।
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मानसून 2026 का आधा सीजन पूरा हो चुका है और अब तक इसका प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा है। जून और जुलाई दोनों महीने बारिश के मामले में एक-दूसरे से बिल्कुल अलग रहे। जून पिछले एक दशक से अधिक समय का सबसे कमजोर बारिश वाला महीना साबित हुआ। इस महीने देशभर में सामान्य से 40% कम बारिश दर्ज की गई। इससे पहले 2014 में जून में 43% बारिश की कमी रही थी और उस वर्ष पूरे मानसून सीजन का अंत 12% वर्षा घाटे के साथ हुआ था।
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हालांकि राहत की बात यह रही कि मानसून समय पर भारत पहुंचा और तय समय के भीतर पूरे देश में फैल भी गया। लेकिन इसके बावजूद शुरुआत और अंतिम चरण में लगभग दो-दो सप्ताह तक मानसून की प्रगति रुक गई, जिससे बारिश की गतिविधियां प्रभावित रहीं। इसका असर खेती, जल संसाधनों और अन्य क्षेत्रों पर भी देखने को मिला। जून में देशभर में 165.3 मिमी के सामान्य के मुकाबले केवल 99.5 मिमी बारिश दर्ज हुई।
जुलाई बना राहत का महीना, बंगाल की खाड़ी के सिस्टम ने बढ़ाई बारिश
जून के विपरीत जुलाई ने मानसून को नई ऊर्जा दी। हालांकि यह महीना भी पूरी तरह आसान नहीं रहा, लेकिन बंगाल की खाड़ी में लगातार बने लो प्रेशर एरिया और डिप्रेशन ने देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जून में भारतीय समुद्री क्षेत्र में कोई प्रभावी मानसूनी सिस्टम नहीं बना था, जबकि जुलाई में एक के बाद एक मौसम प्रणालियां सक्रिय रहीं। इनके कारण देश के कई राज्यों में बारिश का फैलाव और समय दोनों बेहतर हुए। विशेष रूप से मानसून पर निर्भर कृषि क्षेत्रों में अच्छी बारिश हुई, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आई और किसानों को बड़ी राहत मिली।
जुलाई सामान्य से अधिक बारिश वाला महीना रहा, लेकिन पूरे सीजन का घाटा अभी भी बरकरार
जुलाई मानसून सीजन का सबसे अधिक बारिश वाला महीना होता है और यह पूरे मानसून की लगभग 32% बारिश देता है। इस वर्ष जुलाई ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया। महीने के लिए सामान्य वर्षा 280.5 मिमी थी, जबकि वास्तविक बारिश 290.3 मिमी दर्ज की गई, जो सामान्य से लगभग 4% अधिक है। जुलाई के पहले सप्ताह की अच्छी बारिश से जून का 40% घाटा घटकर 9 जुलाई तक 14% रह गया था। लेकिन इसके बाद लगभग 10 दिनों के ब्रेक मानसून के कारण 18 जुलाई तक घाटा फिर बढ़कर 24% हो गया। महीने के अंतिम हिस्से में बारिश में फिर सुधार हुआ और पूरे सीजन का वर्षा घाटा घटकर 13% पर आ गया। उल्लेखनीय है कि 2022 से 2026 तक लगातार पांचवें वर्ष जुलाई में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है।
अगले 10 दिनों में घाटा कम होने की संभावना कम
2 अगस्त 2026 तक देश का मौसमी वर्षा घाटा और 1% घटकर 12% रह गया है। लेकिन अब सबसे बड़ी चुनौती अगस्त का महीना है। मानसून सीजन के आधे रास्ते में 12% वर्षा घाटे की भरपाई करना आसान नहीं होगा, खासकर तब जब अगले लगभग 10 दिनों का मौसम बहुत अनुकूल नहीं दिख रहा है।
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3 अगस्त तक पूरे देश में सामान्य मौसमी वर्षा 473 मिमी हो चुकी है। ऐसे में अब वर्षा घाटे में बड़ा बदलाव लाना मुश्किल होगा। अगले लगभग 5 दिनों तक दैनिक सामान्य 9 मिमी से कम बारिश होने की संभावना है। इसलिए अगस्त के पहले सप्ताह के अंत तक मौसमी घाटा 12% से 13% के बीच बना रह सकता है।
पूरे सीजन का घाटा समाप्त करने के लिए अभी भी लगभग 53.5 मिमी अतिरिक्त बारिश की जरूरत है, जो आसान लक्ष्य नहीं है। इसके अलावा अगस्त में अक्सर लंबे ब्रेक मानसून की स्थिति बनती है। ऐसे में संभावना है कि अगस्त के मध्य तक वर्षा घाटा कम होने के बजाय थोड़ा और बढ़ सकता है।
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