मानसून का यू-टर्न: जुलाई में कभी सूखा तो कभी मूसलाधार बारिश, कैसे सामान्य से ज्यादा हुई वर्षा?
जुलाई 2026 का महीना मानसून के लिहाज से काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। महीने के पहले सप्ताह में देश के अधिकांश हिस्सों में जोरदार बारिश हुई। इसकी वजह से जून के अंत तक बना 40% मौसमी वर्षा घाटा तेजी से घटकर 9 जुलाई तक 14% रह गया। लेकिन दूसरे सप्ताह में मानसून कमजोर पड़ गया और कई इलाकों में बारिश लगभग थम गई। पहले सप्ताह में मिला करीब 50% अतिरिक्त वर्षा का लाभ भी खत्म हो गया। ॉ
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सैटेलाइट इमेज, Himawari
नतीजतन 16 जुलाई तक देश का मौसमी वर्षा घाटा फिर बढ़कर 24% पहुंच गया और 20 जुलाई तक इसी स्तर पर बना रहा। इसके बाद 21 से 24 जुलाई के बीच लगातार करीब चार दिनों तक देश के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश हुई। इस बारिश ने जुलाई महीने की कमी पूरी कर दी और पूरे सीजन का वर्षा घाटा घटकर 15% रह गया। हालांकि अब मौसम प्रणाली कमजोर पड़ने के बाद बारिश में फिर कमी आई है, जिससे मौसमी घाटा थोड़ा बढ़ सकता है।
जुलाई सामान्य बारिश के साथ समाप्त होने की उम्मीद
अगर केवल जुलाई महीने की बात करें तो अब तक देश में सामान्य से थोड़ी अधिक बारिश हुई है। 1 से 26 जुलाई के बीच पूरे देश में 238.2 मिमी बारिश दर्ज हुई, जबकि इस अवधि का सामान्य आंकड़ा 233.9 मिमी है। यानी जुलाई फिलहाल सामान्य से थोड़ा बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। जुलाई महीने के बाकी दिनों में प्रतिदिन औसतन 9 से 9.5 मिमी बारिश सामान्य मानी जाती है। पूरे महीने का सामान्य आंकड़ा पूरा करने के लिए अब लगभग 46.6 मिमी बारिश और चाहिए। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय गहरा दबाव (Deep Depression) और राजस्थान के ऊपर बने चक्रवाती परिसंचरण के कारण जुलाई के अंतिम दिनों में बारिश की गतिविधियां बनी रहेंगी। इसलिए महीने के अंत तक किसी बड़े वर्षा घाटे की संभावना नहीं है। अनुमान है कि जुलाई 2026 सामान्य वर्षा के साथ समाप्त होगा, जबकि मानसून सीजन का कुल वर्षा घाटा करीब 15% के आसपास रह सकता है।
अगस्त-सितंबर में अल-नीनो और IOD पर रहेगी नजर
मानसून के दूसरे हिस्से यानी अगस्त और सितंबर को लेकर फिलहाल कोई स्पष्ट तस्वीर नहीं है। आगे का मौसम काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि एल नीनो (El Niño) कितना मजबूत होता है और इंडियन ओशन डाइपोल (Indian Ocean Dipole - IOD) कितना विकसित होता है। अगले लगभग 10 दिनों के दौरान पूर्वी भारत, पूर्वोत्तर भारत और उत्तर-पश्चिम भारत में समय और स्थान के हिसाब से अच्छी बारिश होने की संभावना है। वहीं, महाराष्ट्र और गुजरात सहित मध्य भारत के कुछ हिस्सों में मानसून कुछ समय के लिए कमजोर रह सकता है।
दूसरी ओर दक्षिण भारत के अधिकांश हिस्सों में बारिश की कमी बनी रहने की आशंका है। तटीय कर्नाटक, केरल और गोवा को छोड़कर आंतरिक और दक्षिण-पूर्वी क्षेत्रों में पर्याप्त बारिश के संकेत फिलहाल नहीं हैं। यहां पहले से चल रहा 29% वर्षा घाटा महीने के अंत तक और बढ़ सकता है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अगस्त के पहले सप्ताह तक मानसून के बाकी सीजन की स्थिति और एल नीनो-IOD के प्रभाव की तस्वीर अधिक स्पष्ट हो जाएगी।
















