Monsoon 2026 Update: बंगाल की खाड़ी का लो-प्रेशर एरिया कमजोर, लेकिन अंडमान सागर में मानसून की एंट्री तय

By: AVM GP Sharma | Edited By: Mohini Sharma
May 15, 2026, 2:00 PM
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बंगाल की खाड़ी में लो-प्रेशर कमजोर

मुख्य मौसम बिंदु

  • बंगाल की खाड़ी का सुस्पष्ट निम्न दबाव क्षेत्र कमजोर पड़ रहा है
  • सिस्टम के चक्रवात बनने की संभावना बेहद कम
  • अंडमान-निकोबार में मानसून के लिए हालात अनुकूल
  • केरल में मानसून पहुंचने में अभी लगभग दो सप्ताह बाकी

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दक्षिण-पश्चिम और उससे सटे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी पर बना सुस्पष्ट निम्न दबाव क्षेत्र फिलहाल लगभग स्थिर बना हुआ है। यह सिस्टम करीब 12.5° उत्तरी अक्षांश और 83° पूर्वी देशांतर के आसपास स्थित है, जो चेन्नई से लगभग 300 किलोमीटर पूर्व में समुद्र के ऊपर बना हुआ है। पहले इस सिस्टम के साथ जो मजबूत मौसमीय संकेत दिखाई दे रहे थे, वे अब कुछ कमजोर पड़ गए हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह निम्न दबाव क्षेत्र अब धीरे-धीरे अपनी ताकत खोता नजर आ रहा है। समुद्र की सतह का तापमान लगभग 28 डिग्री सेल्सियस है, जो सिस्टम को ऊर्जा देने के लिए सीमित रूप से अनुकूल माना जा रहा है। वहीं ऊंचाई पर हवाओं का दबाव और दिशा में अंतर यानी वर्टिकल विंड शियर थोड़ा अधिक है, जो सिस्टम को मजबूत होने से रोक रहा है। इसी वजह से यह सिस्टम अगले 36 घंटों में मजबूत होने के बजाय और कमजोर हो सकता है। इसके साथ ही यह उत्तर-पूर्व दिशा में म्यांमार के अराकान तट की ओर बढ़ेगा।

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अंडमान में मानसून के लिए अनुकूल हालात

यह निम्न दबाव क्षेत्र कमजोर अवस्था में ही म्यांमार के तट की ओर बढ़ेगा। इसके प्रभाव से म्यांमार के तटीय इलाकों में कल और परसों भारी बारिश होने की संभावना है। हालांकि इस सिस्टम ने बंगाल की खाड़ी के दक्षिणी और मध्य हिस्सों में भूमध्यरेखीय हवाओं के प्रवाह को तेज कर दिया है। यही कारण है कि नैनकौरी से लेकर माया बंदर तक अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में पिछले तीन दिनों से रुक-रुक कर बारिश हो रही है। मौसमीय परिस्थितियाँ अब दक्षिण बंगाल की खाड़ी और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए अनुकूल बन चुकी हैं। ऐसे में कभी भी मानसून अंडमान सागर में दस्तक दे सकता है।

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अंडमान के बाद केरल पहुंचने में लगता है समय

आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून 20 से 22 मई के बीच दक्षिण अंडमान सागर से उत्तर अंडमान सागर तक पहुंचता है। इसके बाद मानसून को केरल तट तक पहुंचने में लगभग 10 दिनों का समय लगता है। हालांकि अंडमान सागर और केरल में मानसून पहुंचने की समय-सीमा के बीच मजबूत संबंध माना जाता है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में सुस्पष्ट निम्न दबाव क्षेत्र बनने और उसके म्यांमार तट की ओर बढ़ने से सिस्टम के पीछे हवाओं का प्रवाह कुछ धीमा पड़ जाता है। इसके अलावा लगातार बारिश के कारण उस क्षेत्र की गर्मी और ऊर्जा भी कम हो जाती है। यही वजह है कि मानसूनी धाराओं को दोबारा मजबूत होने और ऊर्जा हासिल करने में कुछ दिन लग जाते हैं। फिलहाल केरल में मानसून पहुंचने की सामान्य तिथि अभी लगभग दो सप्ताह दूर है। इसलिए समय पर मानसून आगमन को लेकर अभी किसी तरह की चिंता की स्थिति नहीं है।

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AVM GP Sharma
President of Meteorology & Climate Change
AVM Sharma, President of Meteorology & Climate Change at Skymet Weather Services, is a retired Indian Air Force officer who previously led the Meteorological Branch at Air Headquarters in New Delhi. With over a decade of experience at Skymet, he brings a wealth of knowledge and expertise to the organization.
FAQ

नहीं, मौजूदा मौसम परिस्थितियों के अनुसार सिस्टम के मजबूत होकर चक्रवात बनने की संभावना बहुत कम है।

मौसमीय परिस्थितियां अनुकूल हैं और जल्द ही दक्षिण-पश्चिम मानसून अंडमान सागर में प्रवेश कर सकता है।

फिलहाल ऐसी कोई चिंता नहीं है। केरल में मानसून की सामान्य आगमन तिथि अभी लगभग दो सप्ताह दूर है।

डिस्क्लेमर: डिस्कलेमर- यह विश्लेषण स्काइमेट के मौसम संबंधी आंकड़ों, आंतरिक पूर्वानुमान मॉडल, मौसम केंद्रों से प्राप्त जानकारी, जलवायु संबंधी डेटा और स्काइमेट की मौसम विशेषज्ञ टीम के आकलन पर आधारित है। सटीक जानकारी देने का पूरा प्रयास किया गया है, लेकिन मौसम लगातार बदलने वाली प्राकृतिक प्रक्रिया है, इसलिए परिस्थितियां समय के साथ बदल सकती हैं। यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से दी गई है और इसे अंतिम या पूरी तरह निश्चित मौसम पूर्वानुमान नहीं माना जाना चाहिए।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है