भारी बारिश के बावजूद कई हिस्सों में कम नहीं हुआ बारिश का घाटा, अगस्त में सामान्य से कम बरसात के आसार, जानें क्यों?

By: AVM GP Sharma | Edited By: Mohini Sharma
Aug 11, 2026, 6:00 PM
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मानसून 2026 अपडेट

मुख्य मौसम बिंदु

  • जून में बारिश 35% से ज्यादा कम, जुलाई में करीब 1% अधिक रही।
  • 1-11 अगस्त तक मानसून की कमी 11-12% पर बनी है।
  • पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश की कमी करीब 26% है।
  • 16 अगस्त के आसपास ब्रेक मानसून की संभावना, बारिश का फोकस तलहटी और पूर्वोत्तर पर रह सकता है।
  • Forecast Validity: यह आकलन अगस्त 2026 की मौसम गतिविधियों के लिए है; ब्रेक की अवधि और उसके प्रभाव को लेकर अगले 2-3 दिनों में तस्वीर ज्यादा स्पष्ट होगी।

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मानसून के शुरुआती महीने जून में देशभर में बारिश काफी कम रही थी। जून में सामान्य से 35% से ज्यादा बारिश की कमी दर्ज हुई। इसके बाद मानसून के मुख्य महीने जुलाई ने कुछ हद तक स्थिति संभाली। जुलाई में देशभर में 283.3 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से करीब 1% अधिक थी। इसके बावजूद जून की बड़ी कमी पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी और जुलाई के अंत तक मानसूनी सीजन में बारिश की कुल कमी करीब 13% बनी हुई थी।

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अब अगस्त की शुरुआत ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। 1 से 11 अगस्त के बीच देश में बारिश सामान्य से कम रही और मानसून की कुल कमी लगभग 11-12% के आसपास ही बनी हुई है। इस दौरान कुछ हिस्सों में भारी बारिश जरूर हुई, लेकिन उसका दायरा बहुत सीमित रहा। यानी जहां बारिश हुई, वहां अच्छी बारिश हुई, लेकिन देश के बड़े हिस्से तक उसका असर नहीं पहुंच पाया। चार प्रमुख मौसम क्षेत्रों में केवल मध्य भारत सामान्य स्थिति यानी ‘ब्रेक ईवन’ पर है। इसके विपरीत बाकी क्षेत्रों में कई हिस्से बारिश की कमी से जूझ रहे हैं। सबसे ज्यादा कमी पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में करीब 26% है।

बंगाल की खाड़ी में मजबूत सिस्टम नहीं बनने से मानसून की रफ्तार थमी

जुलाई के दौरान बंगाल की खाड़ी से कई प्रभावी मानसूनी सिस्टम बने थे, जिन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश को गति दी। लेकिन अगस्त में अभी तक बंगाल की खाड़ी से ऐसा कोई मजबूत मानसूनी सिस्टम नहीं बना है। इन सिस्टम की कमी ने जुलाई में बनी मानसून की रफ्तार को कमजोर कर दिया है।

इसके पीछे एक महत्वपूर्ण कारण पश्चिमी प्रशांत महासागर में सक्रिय शक्तिशाली टाइफून गतिविधि है। पिछले सप्ताहांत बेहद शक्तिशाली टाइफून ‘डॉल्फिन’ ने दक्षिण चीन के तट पर असर डाला। इसके अलावा समुद्र के अलग-अलग हिस्सों में, जैसे जापान सागर, पूर्वी फिलीपींस सागर और पश्चिमी प्रशांत के दूर के हिस्सों में भी कुछ और तूफानी सिस्टम सक्रिय होने की स्थिति में हैं। जब ऐसे शक्तिशाली तूफान दक्षिण चीन सागर और पश्चिमी फिलीपींस सागर की ओर बढ़ते हैं, तो वे बड़े पैमाने के वायुमंडलीय परिसंचरण को अस्थायी रूप से बदल सकते हैं। इसका असर भारतीय समुद्रों से आने वाली मानसूनी हवाओं पर पड़ता है। इससे बंगाल की खाड़ी के ऊपर बादल बनने और ऊपर उठने की प्रक्रिया यानी कन्वेक्शन कमजोर हो सकती है और संभावित मानसूनी सिस्टम बनने में देरी हो सकती है या वे कमजोर पड़ सकते हैं।

अगस्त के पहले 10 दिनों में दो कमजोर सिस्टम

अगस्त के पहले 10 दिनों में दो कमजोर मानसूनी सिस्टम जरूर बने। इनसे जुड़े निम्न दबाव क्षेत्रों और चक्रवाती परिसंचरणों ने देश में बारिश की कमी को बहुत तेजी से बढ़ने से रोका। इन सिस्टम से कुछ इलाकों में बारिश की तीव्रता अच्छी रही, लेकिन बारिश का फैलाव बहुत सीमित था। यही वजह है कि देश का कुल बारिश घाटा बहुत ज्यादा नहीं बढ़ा, लेकिन उसमें कोई बड़ी सुधार भी नहीं हुआ।

इस समय उत्तर-पश्चिमी मध्य प्रदेश के ऊपर बना निम्न दबाव क्षेत्र छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्सों में भारी बारिश करा रहा है। यह सिस्टम अगले 24 से 36 घंटों में कमजोर होकर मानसून ट्रफ में मिल जाएगा। इसके बाद करीब 24 घंटे में एक और सिस्टम बनने की संभावना है। लेकिन यह भी कमजोर सिस्टम रहने और इसका प्रभाव सीमित रहने की आशंका है। इससे बारिश मुख्य रूप से पूर्वी राज्यों और मध्य भारत के आसपास के कुछ हिस्सों तक सीमित रह सकती है। यह सिस्टम भी पहले बने सिस्टम की तरह मानसून की कुल बारिश की कमी को अचानक बहुत ज्यादा बढ़ने से रोक सकता है, लेकिन देशभर में व्यापक बारिश कराने की स्थिति में नहीं होगा।

इसलिए अगस्त के मध्य तक रोजाना होने वाली बारिश सामान्य आंकड़े से थोड़ी कम रह सकती है। मौजूदा अनुमान के मुताबिक अगस्त के मध्य तक मानसून की कुल कमी करीब 12% LPA के आसपास बनी रह सकती है। LPA यानी Long Period Average, किसी लंबी अवधि के औसत के आधार पर तय की गई सामान्य बारिश को कहा जाता है।

अगस्त के अंत तक सामान्य से कम बारिश की आशंका

अगस्त का महीना मानसून में ‘ब्रेक’ की स्थिति बनने के लिहाज से ज्यादा संवेदनशील माना जाता है। इस बार भी करीब 16 अगस्त के आसपास ब्रेक मानसून की स्थिति विकसित होने की संभावना है। हालांकि यह ब्रेक कितने दिनों तक चलेगा, इसकी स्पष्ट तस्वीर अभी नहीं है। अगले 2-3 दिनों में इस बारे में ज्यादा जानकारी मिल सकती है।

ब्रेक मानसून के दौरान बारिश का मुख्य फोकस हिमालय की तलहटी, बिहार के कुछ हिस्सों, सिक्किम, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर भारत तक सीमित हो जाता है। देश के ज्यादातर अन्य हिस्सों में बारिश काफी कम हो जाती है। जब तक ब्रेक की स्थिति बनी रहती है, देश के बड़े हिस्से में बारिश की कमी बढ़ सकती है। मानसून की सामान्य गतिविधियां तभी दोबारा मजबूत होती हैं जब बंगाल की खाड़ी के उत्तरी हिस्से में यानी हेड बे ऑफ बंगाल के आसपास कोई मजबूत मानसूनी सिस्टम विकसित होता है। फिलहाल ऐसे किसी मजबूत सिस्टम के बनने के शुरुआती संकेत भी नजर नहीं आ रहे हैं।

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ब्रेक मानसून की स्थिति कई बार एक सप्ताह से ज्यादा समय तक बनी रह सकती है और इससे देशभर में बारिश का वितरण बिगड़ सकता है। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए संभावना है कि अगस्त का महीना सामान्य से कम बारिश के साथ समाप्त हो सकता है। अगर अगस्त में बारिश की कमी काफी बढ़ती है, तो सितंबर जैसे अपेक्षाकृत कम बारिश वाले महीने में उस कमी को पूरा करना चुनौतीपूर्ण होगा। इसलिए आने वाले दिनों में बंगाल की खाड़ी में किसी मजबूत मानसूनी सिस्टम के बनने पर खास नजर रहेगी।

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AVM GP Sharma
President of Meteorology & Climate Change
AVM Sharma, President of Meteorology & Climate Change at Skymet Weather Services, is a retired Indian Air Force officer who previously led the Meteorological Branch at Air Headquarters in New Delhi. With over a decade of experience at Skymet, he brings a wealth of knowledge and expertise to the organization.
FAQ

अगस्त में बंगाल की खाड़ी से मजबूत मानसूनी सिस्टम नहीं बन पाए हैं। इसके अलावा पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में सक्रिय शक्तिशाली टाइफून गतिविधियां बड़े पैमाने के वायुमंडलीय परिसंचरण को प्रभावित कर रही हैं, जिससे भारतीय समुद्रों से आने वाली मानसूनी हवाओं और बंगाल की खाड़ी में बादल बनने की प्रक्रिया कमजोर हो रही है।

ब्रेक मानसून के दौरान देश के ज्यादातर हिस्सों में बारिश काफी कम हो जाती है, जबकि बारिश का फोकस हिमालय की तलहटी, बिहार के कुछ हिस्सों, सिक्किम, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर भारत पर चला जाता है। इससे देश के बाकी हिस्सों में बारिश की कमी बढ़ सकती है।

मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अगस्त के सामान्य से कम बारिश के साथ समाप्त होने की संभावना है। अगर 16 अगस्त के आसपास ब्रेक मानसून की स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है और बंगाल की खाड़ी में कोई मजबूत सिस्टम नहीं बनता, तो बारिश की कमी और बढ़ सकती है।

डिस्क्लेमर: डिस्कलेमर- यह विश्लेषण स्काइमेट के मौसम संबंधी आंकड़ों, आंतरिक पूर्वानुमान मॉडल, मौसम केंद्रों से प्राप्त जानकारी, जलवायु संबंधी डेटा और स्काइमेट की मौसम विशेषज्ञ टीम के आकलन पर आधारित है। सटीक जानकारी देने का पूरा प्रयास किया गया है, लेकिन मौसम लगातार बदलने वाली प्राकृतिक प्रक्रिया है, इसलिए परिस्थितियां समय के साथ बदल सकती हैं। यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से दी गई है और इसे अंतिम या पूरी तरह निश्चित मौसम पूर्वानुमान नहीं माना जाना चाहिए।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है

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