पूर्वोत्तर में फिर एक सप्ताह भारी मानसून बारिश, असम और अरुणाचल भारी वर्षा का अलर्ट, बढ़ेगा बाढ़ का खतरा

By: AVM GP Sharma | Edited By: Mohini Sharma
Jul 29, 2026, 4:45 PM
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मुख्य मौसम बिंदु

  • असम में प्रभावित लोगों की संख्या घटकर 4.45 लाख हुई, लेकिन 6 जिले अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं।
  • गहरे अवदाब और मानसून ट्रफ के प्रभाव से पूर्वोत्तर भारत में अगले एक सप्ताह तक भारी बारिश की संभावना है।
  • ऊपरी असम और अरुणाचल प्रदेश में सबसे अधिक बारिश होगी, जिससे ब्रह्मपुत्र नदी का जलस्तर बढ़ सकता है।
  • राहत एवं बचाव कार्य जारी हैं, लेकिन शाम, रात और सुबह के समय खराब मौसम से चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
  • पूर्वानुमान वैधता: यह पूर्वानुमान 28 जुलाई से 4 अगस्त 2026 तक प्रभावी है। मौसम प्रणालियों की गति और तीव्रता में बदलाव होने पर पूर्वानुमान में संशोधन संभव है।

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पूर्वोत्तर भारत पिछले लगभग एक सप्ताह से भीषण बाढ़ की चपेट में है। हाल के दिनों में असम में बाढ़ की स्थिति में कुछ सुधार देखने को मिला है और प्रभावित लोगों की संख्या घटकर करीब 4.45 लाख रह गई है। इसके बावजूद राज्य के 6 जिले अब भी बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं। सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शिवसागर, गोलाघाट, चराइदेव, जोरहाट, नगांव और कामरूप शामिल हैं। इनमें चराइदेव सबसे ज्यादा प्रभावित जिला है, जबकि उसके बाद शिवसागर और जोरहाट का स्थान है। राहत की बात यह है कि बचाव, राहत और पुनर्वास कार्य लगातार जारी हैं तथा मृतकों की संख्या फिलहाल 68 पर स्थिर बनी हुई है। हालांकि मौसम फिर से बिगड़ने के संकेत दे रहा है, जिससे राहत और बचाव कार्यों में नई चुनौतियां आ सकती हैं।

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गहरा अवदाब बढ़ाएगा बारिश, मानसूनी हवाओं का बदलेगा रुख

उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बना गहरा अवदाब (Deep Depression) पश्चिम बंगाल के दीघा के पास तट पार कर चुका है। यह धीरे-धीरे पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ रहा है। ऐसी मौसम प्रणालियों के तट पार करने के बाद आमतौर पर पूर्वोत्तर भारत, विशेषकर असम घाटी में हवाओं की दिशा पूर्वी (Easterly) से बदलकर पश्चिमी (Westerly) हो जाती है। बंगाल की खाड़ी से आने वाली दक्षिण-पश्चिमी हवाएं क्षेत्र में बड़ी मात्रा में नमी लेकर पहुंचती हैं। इसके साथ ही मानसून ट्रफ भी पूर्वोत्तर भारत की तराई वाले क्षेत्रों की ओर खिसकने लगता है। इन सभी मौसम प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश की गतिविधियां एक बार फिर तेज होने की संभावना है।

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ऊपरी असम में सबसे ज्यादा खतरा, ब्रह्मपुत्र का जलस्तर फिर बढ़ सकता है

बाढ़ की स्थिति पूरी तरह सामान्य होने से पहले ही एक नया बारिश का दौर शुरू होने वाला है। अगले एक सप्ताह तक पूर्वोत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में खराब मौसम बना रह सकता है।शुरुआत में पूर्वी अरुणाचल प्रदेश, पूर्वी असम, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम में तेज बारिश होगी। सप्ताह के आगे बढ़ने के साथ पूरा अरुणाचल प्रदेश और ऊपरी असम व्यापक वर्षा की चपेट में आ जाएंगे। इन बारिशों के कारण ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी सहायक नदियों में जलप्रवाह बढ़ने की संभावना है, क्योंकि इनके जलग्रहण क्षेत्रों में भी अच्छी बारिश होगी। इससे असम घाटी में एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।

सबसे अधिक जोखिम ऊपरी असम के तिनसुकिया, डिब्रूगढ़, चराइदेव, शिवसागर, माजुली, लखीमपुर, गोलाघाट, जोरहाट, तेजपुर, नगांव, दिसपुर और गुवाहाटी जैसे जिलों में रहेगा। वहीं निचले असम में स्थिति ऊपरी असम जितनी गंभीर नहीं दिख रही है, लेकिन धुबरी, कोकराझार, गोलपाड़ा, बोंगाईगांव, बारपेटा, नलबाड़ी और कामरूप जिलों में भी सतर्क रहने की जरूरत होगी। मौसम का सामान्य पैटर्न यही रहेगा कि शाम, रात और तड़के सुबह बारिश, गरज-चमक और बिजली गिरने की घटनाएं अधिक होंगी, जबकि दोपहर तक मौसम बेहतर रह सकता है। यही समय राहत और बचाव कार्यों के लिए सबसे अनुकूल रहेगा।

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AVM GP Sharma
President of Meteorology & Climate Change
AVM Sharma, President of Meteorology & Climate Change at Skymet Weather Services, is a retired Indian Air Force officer who previously led the Meteorological Branch at Air Headquarters in New Delhi. With over a decade of experience at Skymet, he brings a wealth of knowledge and expertise to the organization.
FAQ

ऊपरी असम के तिनसुकिया, डिब्रूगढ़, चराइदेव, शिवसागर, माजुली, गोलाघाट, जोरहाट, तेजपुर और नगांव सहित कई जिलों में दोबारा बाढ़ का खतरा अधिक है।

अगले लगभग एक सप्ताह तक असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम सहित अधिकांश पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

अरुणाचल प्रदेश और ऊपरी असम के जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार भारी बारिश होने से ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों में पानी का प्रवाह बढ़ने की संभावना है।

डिस्क्लेमर: डिस्कलेमर- यह विश्लेषण स्काइमेट के मौसम संबंधी आंकड़ों, आंतरिक पूर्वानुमान मॉडल, मौसम केंद्रों से प्राप्त जानकारी, जलवायु संबंधी डेटा और स्काइमेट की मौसम विशेषज्ञ टीम के आकलन पर आधारित है। सटीक जानकारी देने का पूरा प्रयास किया गया है, लेकिन मौसम लगातार बदलने वाली प्राकृतिक प्रक्रिया है, इसलिए परिस्थितियां समय के साथ बदल सकती हैं। यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से दी गई है और इसे अंतिम या पूरी तरह निश्चित मौसम पूर्वानुमान नहीं माना जाना चाहिए।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है

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