बिहार और पूर्वी यूपी में भारी बारिश के आसार, बढ़ सकता है बाढ़ का संकट

By: AVM GP Sharma | Edited By: Mohini Sharma
Sep 7, 2026, 4:30 PM
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यूपी-बिहार मौसम अपडेट, फोटो:AI-Generated

मुख्य मौसम बिंदु

  • पूर्वी उत्तर प्रदेश में मौसमी बारिश की कमी घटकर केवल 6% रह गई है।
  • बिहार में बारिश की कमी सुधरकर 35% पर पहुंची।
  • 9 से 11 सितंबर के बीच बिहार में बारिश बढ़ेगी।
  • नेपाल की तलहटी और हिमालयी क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा हैॉ
  • पूर्वानुमान वैधता: यह मौसम अपडेट 11 सितंबर तक मान्य है।

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बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश मानसून सीजन के आधे समय तक देश के उन दो उप-विभागों में शामिल थे, जहां लगातार बड़ी बारिश की कमी बनी हुई थी। हालांकि इस साल देशभर में मानसूनी बारिश बहुत अच्छी नहीं रही, लेकिन मानसून सिस्टमों के रास्ते और बारिश के वितरण में बदलाव के कारण अगस्त के दूसरे पखवाड़े में पूर्वी भारत में बारिश की स्थिति बेहतर हुई। यह गतिविधि सितंबर के पहले सप्ताह में भी जारी रही। इसके चलते पूर्वी उत्तर प्रदेश में बारिश की कमी अब केवल 6% रह गई है, जबकि बिहार का आंकड़ा भी सुधरकर -35% हो गया है। यानी बिहार में अभी भी 35% बारिश की कमी है, लेकिन पहले की तुलना में यह एक अच्छी रिकवरी है। अगले एक सप्ताह में इन दोनों क्षेत्रों के मौसमी आंकड़ों में और सुधार होने की संभावना है।

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कम दबाव का क्षेत्र पूर्वी उत्तर प्रदेश और उत्तर बिहार की ओर बढ़ेगा

इस समय दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के आसपास बना कम दबाव का क्षेत्र कमजोर होते हुए मध्य उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ गया है। अब इसके और पूर्व की ओर खिसकने की संभावना है। यह सिस्टम इस सप्ताहांत तक पूर्वी उत्तर प्रदेश और उत्तर बिहार के ऊपर प्रभावी रह सकता है। मौसम गतिविधियां पहले 8 सितंबर को पूर्वी उत्तर प्रदेश में पहुंचेंगी और इसके अगले दिन यानी 9 सितंबर को बिहार तक फैलने की संभावना है। 9 से 11 सितंबर के बीच इन दोनों क्षेत्रों में बारिश का दायरा और तीव्रता काफी अच्छी रह सकती है। इसके बाद भी बारिश पूरी तरह खत्म नहीं होगी। अगले कुछ दिनों तक छिटपुट से लेकर कुछ स्थानों पर मध्यम से भारी बारिश जारी रह सकती है। इसलिए बारिश की कमी में सुधार का सिलसिला आगे भी जारी रहने की संभावना है।

बढ़ते नदी स्तर से बाढ़ का संकट गहरा सकता है

पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों और उत्तर बिहार में पहले से ही नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। इन क्षेत्रों की कई बारहमासी नदियों और धाराओं का उद्गम हिमालय में होता है और वे नेपाल के रास्ते इन मैदानी इलाकों तक पहुंचती हैं। ऐसे में नेपाल की तलहटी और आसपास के क्षेत्रों में होने वाली अतिरिक्त बारिश, साथ ही अगले कुछ दिनों तक जारी रहने वाली मानसूनी गतिविधि, बाढ़ की स्थिति में सुधार को मुश्किल बना सकती है। इसके उलट नदियों का जलस्तर और बढ़ने की संभावना भी है, जिससे पहले से बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्थिति और बिगड़ सकती है। यानी एक तरफ सामान्य से कम बारिश वाले मौसम के आंकड़ों में सुधार होगा, लेकिन दूसरी तरफ जिन इलाकों में पहले से बाढ़ की समस्या है, वहां लोगों की परेशानी बढ़ सकती है।

मानसून के आंकड़ों के लिए अच्छी बारिश, लेकिन बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए चिंता

बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए आने वाले दिनों की बारिश दो अलग-अलग तस्वीरें पेश कर सकती है। एक ओर लगातार बारिश से मौसमी बारिश की कमी कम होगी और मानसून के आंकड़े बेहतर होंगे। पूर्वी उत्तर प्रदेश में कमी पहले ही बहुत घटकर 6% रह गई है और अगले सप्ताह इसमें और सुधार संभव है। बिहार में भी स्थिति धीरे-धीरे बेहतर हो रही है, हालांकि अभी 35% का घाटा बना हुआ है। दूसरी ओर, पहले से संतृप्त जमीन और ऊंचे नदी जलस्तर वाले क्षेत्रों में लगातार बारिश से बाढ़ की समस्या और गंभीर हो सकती है। खासकर नेपाल की तलहटी से आने वाला अतिरिक्त पानी स्थिति को और प्रभावित कर सकता है। इसलिए आने वाले दिनों में इन दोनों राज्यों में बारिश की निगरानी जरूरी होगी। मानसून के लिहाज से यह बारिश राहत देने वाली हो सकती है, लेकिन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए यही बारिश नई चुनौती बन सकती है।

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AVM GP Sharma
President of Meteorology & Climate Change
AVM Sharma, President of Meteorology & Climate Change at Skymet Weather Services, is a retired Indian Air Force officer who previously led the Meteorological Branch at Air Headquarters in New Delhi. With over a decade of experience at Skymet, he brings a wealth of knowledge and expertise to the organization.
FAQ

पूर्वी उत्तर प्रदेश में मौसमी बारिश की कमी अब केवल 6% है, जबकि बिहार में अभी 35% बारिश की कमी बनी हुई है।

8 सितंबर को पूर्वी उत्तर प्रदेश में बारिश बढ़ने की संभावना है और 9 सितंबर को इसका विस्तार बिहार तक होगा। 9 से 11 सितंबर के बीच बारिश की गतिविधि अच्छी रह सकती है।

पूर्वी यूपी और उत्तर बिहार की कई नदियों का पानी हिमालय और नेपाल क्षेत्र से आता है। तलहटी में अतिरिक्त बारिश और लगातार मानसूनी गतिविधि से नदी जलस्तर बढ़ सकता है, जिससे बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्थिति खराब हो सकती है।

डिस्क्लेमर: डिस्कलेमर- यह विश्लेषण स्काइमेट के मौसम संबंधी आंकड़ों, आंतरिक पूर्वानुमान मॉडल, मौसम केंद्रों से प्राप्त जानकारी, जलवायु संबंधी डेटा और स्काइमेट की मौसम विशेषज्ञ टीम के आकलन पर आधारित है। सटीक जानकारी देने का पूरा प्रयास किया गया है, लेकिन मौसम लगातार बदलने वाली प्राकृतिक प्रक्रिया है, इसलिए परिस्थितियां समय के साथ बदल सकती हैं। यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से दी गई है और इसे अंतिम या पूरी तरह निश्चित मौसम पूर्वानुमान नहीं माना जाना चाहिए।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है