Western Disturbance Active: हिमाचल-उत्तराखंड में मई के पहले हफ्ते तक बारिश और ओलावृष्टि के आसार
मुख्य मौसम बिंदु
- मार्च के बाद से पश्चिमी विक्षोभ लगातार सक्रिय
- पश्चिमी हिमालय में बार-बार बारिश और बर्फबारी
- मई के पहले हफ्ते तक जारी रह सकता है यह सिलसिला
- जल संकट कम करने में मददगार साबित होगा मौसम
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इस साल सर्दियों के दौरान पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश और बर्फबारी हुई। आमतौर पर मार्च के दूसरे पखवाड़े से अप्रैल के बीच पश्चिमी विक्षोभ कमजोर पड़ने लगते हैं, जिससे बारिश कम हो जाती है। लेकिन इस बार मौसम ने अलग रुख अपनाया और हालात सामान्य से अलग बने रहे।
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मार्च के बाद से लगातार सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ
मार्च के मध्य से ही पश्चिमी विक्षोभ लगातार सक्रिय बने हुए हैं, जिससे पश्चिमी हिमालय में बार-बार बारिश, गरज-चमक और बर्फबारी देखने को मिली। इन सिस्टम्स के कारण उत्तरी मैदानी इलाकों में भी प्री-मानसून गतिविधियाँ बढ़ीं, जिससे मौसम सुहावना बना रहा और गर्मी से राहत मिली।
राज्यों में बारिश का मिला-जुला असर
1 मार्च से 23 अप्रैल तक के आंकड़ों के अनुसार अलग-अलग राज्यों में बारिश की स्थिति अलग रही। उत्तराखंड में 22% अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि हिमाचल प्रदेश में बारिश सामान्य के आसपास रही। जम्मू-कश्मीर में 24% की कमी देखी गई, वहीं लद्दाख में 31% अधिक बारिश हुई। यह दिखाता है कि पूरे क्षेत्र में बारिश का प्रभाव समान नहीं रहा।
मई के पहले हफ्ते तक जारी रहेगा असर
23 अप्रैल को एक नया पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालय में पहुंचा, जिससे जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद में बारिश की संभावना है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। आने वाले दिनों में ऐसे कई सिस्टम सक्रिय रहेंगे, जिससे मई के पहले हफ्ते तक बारिश, आँधी-तूफान और ओलावृष्टि जारी रह सकती है। यह स्थिति जल संकट को कम करने और नमी बढ़ाने में मददगार साबित होगी।
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